
2024
Diaries & Journals
Dr. Rajendra Prasad & Ramprasad Bismil
9789362504869
1
Hindi
301-400 Pages
Paperback
Atmakatha : Dr. Rajendra Prasad & Atmakatha : Ramprasad Bismil - Set of 2 Autobiography Books
10
Biographies
SAHITYA SAROWAR
SAHITYA SAROWAR
India
Name : Atmakatha : Dr. Rajendra Prasad & Atmakatha : Ramprasad Bismil - Set of 2 Autobiography Books
Author : Dr. Rajendra Prasad & Ramprasad Bismil
Book Format : Paperback
Edition : 1
Genre : Biographies
ISBN : 9789362504869
Language : Hindi
Pages : 301-400 Pages
Publish Year : 2024
Publisher : SAHITYA SAROWAR
Sub Genre : Diaries & Journals
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आत्मकथा का अधिकांश हिस्सा 1942 और 1945 के बीच जेल में रहने के दौरान लिखा गया था। पहली बार हिंदी में प्रकाशित, यह हमें उनके बचपन, उनके गांव छपरा में उनके जीवन, उनके शिक्षक के साथ उनकी प्रारंभिक शिक्षा के बारे में बताता है।आत्मकथा—रामप्रसाद बिस्मिल अंतिम समय निकट है। दो फाँसी की सजाएँ सिर पर झूल रही हैं। पुलिस को साधारण जीवन में और समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं में खूब जी भर के कोसा है। खुली अदालत में जज साहब, खुफिया पुलिस के अफसर, मजिस्ट्रेट, सरकारी वकील तथा सरदार को खूब आड़े हाथों लिया है। हरेक के दिल में मेरी बातें चुभ रही हैं। कोई दोस्त, आशना अथवा यार मददगार नहीं, जिसका सहारा हो। एक परमपिता परमात्मा की याद है।
गीता पाठ करते हुए संतोष है— जो कुछ किया सो तैं किया, मैं खुद की हा नाहिं, जहाँ कहीं कुछ मैं किया, तुम ही थे मुझ माहिं। ‘जो फल की इच्छा को त्याग करके कर्मों को ब्रह्म में अर्पण करके कर्म करता है, वह पाप में लिप्त नहीं होता। जिस प्रकार जल में रहकर भी कमलपत्र जलमय नहीं होता।’ जीवनपर्यंत जो कुछ किया, स्वदेश की भलाई समझकर किया। यदि शरीर की पालना की तो इसी विचार से कि सुदृढ़ शरीर से भली प्रकार स्वदेश-सेवा हो सके। बड़े प्रयत्नों से यह शुभ दिन प्राप्त हुआ।
Country of Origin : India
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