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Name : इतिहास पुरुष मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम
राम मन्दिर के उद्घाटन के अवसर पर इस किताब का आना दैवीय संयोग से कम नहीं। राम जिससे जो चाहते हैं, करा ही लेते हैं। ये तब और ज्यादा सच लगने लगता है जब यह मालूम पड़े कि गिरीश बिल्लोरे मुकुल ने यह किताब तब लिखी जब वे फेफड़े के कैंसर से जूझ रहे थे। अप्रैल २०२३ को फेफड़े का कैंसर डिटेक्ट होने के बाद उसी माह मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में भर्ती हुए जहाँ उनका एक फेफड़ा निकाल दिया गया और वापस जबलपुर आकर दो माह की अवकाश अवधि में बोल बोल कर टाइप कराया और किताब पूरी की। अब ये राम इच्छा नहीं तो क्या है कि जीवन मृत्यु से जूझते व्यक्ति को न केवल बचाया बल्कि लोकोपयोगी किताब भी लिखवा दी।
उनके इस वाकये को सुनकर तो रामानन्द सागर द्वारा रामायण धारावाहिक के निर्माण के दौरान कैसे समय समय पर ईश्वरीय प्रेरणा और मदद उन्हें मिलती रही, जिसका जिक्र कई बार सुना है, आज फिर से याद आ गए। किताब राम पर है इसलिए ज्यादा क्या कहूँ बस इतना ही इसे लिखने वाले, इसके प्रकाशक और इसके पाठकों पर, हम सब पर राम की कृपा हो। शुभकामनाओं के साथ.......
Country of Origin : India
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