
India
Name : ज्ञान की महिमा Magnificence of Jñāna
पुस्तक के विषय में- ^ज्ञान की महिमा’ नामक पुस्तक में प्रयुक्त ^ज्ञान’शब्द इतना अथाह एवं अकथनीय है कि वर्त्तमान एवं भविष्य का समस्त ज्ञान इसमें समाहित है। मैंने पवित्र शब्द ^ज्ञान’ की महिमा का प्रसंगानुसार निरूपित करने का तुच्छ प्रयास किया है] जो विश्वकल्याणकारी श्री वाल्मीकि रामायण] श्रीमद्भगवद्गीता तथा श्री रामचरित मानस में क्रमशः 19] 63 तथा 147 बार आवृत्त हुआ है। मुझे पूर्ण आशा है कि पाठकगण अपने स्थायी आनन्द प्राप्ति हेतु पवित्र एवं अमर तीन धार्मिक ग्रन्थ रूपी त्रिवेणी की ज्ञान&गंगा में स्नानकर आध्यात्मिक आनन्द का अनुभव करेंगे। About the Book English : The word 'Jnana is so fathomless and ineffable that the whole jnana of present and future is vested in it. I have trivial endeavoured to explicate the magnificence of The word 'jnana' repeated 19, 63 and 147 times in S'ri' Valmiki Ramayana, Sri Madbhagwadgita and Sri Ramacharitamanasa' respectively. लेखक के विषय में- डॉ. कृष्णदेव अग्रवाल ^अरविन्द’ एम-ए- हिन्दी-इंग्लिश’ बी-टी-] एम-एड-] पीएच-डी- (संस्कृत) ] आयुर्वेदरत्न] पूर्वप्रवक्ता-एस-सी-ई-आर-टी- दिल्ली] प्रमुख शिक्षाशास्त्री] सम्पादक] कहानी] निबन्ध] नाटक] बालसाहित्य एवं मुक्तक काव्यकार के रूप में केन्द्रीय सू-एवं प्र- मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ^भारतेन्दु हरिश्चन्द्र सम्मान About the Author-English: Dr. Krisna Dev Agrawal 'Arvind', being as an M.A. (Eng& Hindi) B.T, M.Ed., Ph.D (SKT), Ayurved Ratna, Sr. Lecturer Retd.) S.C.E.R.T. Delhi, an eminent author, poet, educationist a
Country of Origin : India
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